खाड़ी क्षेत्र में भारतीय समुद्री नाविकों के हितों एवं सुरक्षा का संरक्षण

पाठ्यक्रम: GS2/अंतरराष्ट्रीयसंबंध, GS3/सुरक्षा

संदर्भ

  • हाल ही में भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के समक्ष गंभीर आपत्ति दर्ज कराई, जब फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक हमलों के परिणामस्वरूप वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई।

वैश्विक नौवहन में भारतीय नाविक

  • भारत का वैश्विक समुद्री कार्यबल: भारत विश्व में समुद्री मानव संसाधन उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है।
    • विश्वभर में लगभग 3.5 लाख भारतीय नाविक वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत हैं।
    • इनमें से आधे से अधिक नाविक सक्रिय रूप से कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर सेवाएँ दे रहे हैं।
    • विश्व के बड़े वाणिज्यिक जहाजों पर कार्यरत प्रत्येक छह नाविकों में से लगभग एक भारतीय है।
    • अनुमानतः 23,000 भारतीय नाविक खाड़ी क्षेत्र में कार्यरत हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का प्रमुख योगदान है।
  • सामरिक महत्त्व: भारतीय नाविक वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • वे भारत में विदेशी मुद्रा प्रेषण के प्रवाह में उल्लेखनीय योगदान देते हैं।
    • तेल एवं गैस परिवहन में उनकी भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जो प्रत्यक्ष रूप से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित करती है।

क्या अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून नागरिक चालक दल को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है?

  • वैश्विक नौवहन के विनियमन हेतु प्रमुख संस्था अंतरराष्ट्रीयसमुद्री संगठन(IMO) है, जो संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है।
  • यद्यपि IMO सर्वसम्मति एवं नियम-निर्माण के माध्यम से वैश्विक नौवहन के तकनीकी, वाणिज्यिक, पर्यावरणीय तथा सुरक्षा संबंधी पहलुओं को विनियमित करने की क्षमता रखता है, फिर भी जहाजों एवं नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में यह कई बार अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पाया है।
  • महासागरों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानूनी ढाँचा समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन(UNCLOS) है।
  • इसके प्रावधान एवं अधिदेश व्यापक हैं तथा दशकों तक चले वार्तालाप एवं सर्वसम्मति-निर्माण की प्रक्रिया का परिणाम हैं।
  • UNCLOS अत्यंत विस्तृत है तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों से आवागमन सहित विभिन्न परिस्थितियों को समाहित करता है।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस आधार पर UNCLOS पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया कि यह गहरे समुद्री तल को वैश्विक साझा संपत्ति मानता है।
  • ईरान ने इस अभिसमय पर हस्ताक्षर तो किए हैं, किंतु अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की है।

सुविधा ध्वज (Flag of Convenience-FOC) एवं भारत की सीमाएँ 

  • सुविधा ध्वज (Flag of Convenience-FOC) उस व्यवस्था को संदर्भित करता है, जिसमें किसी जहाज का पंजीकरण उस देश में किया जाता है जहाँ उसका वास्तविक स्वामी स्थित नहीं होता।
    • इस प्रणाली के अंतर्गत जहाज उस देश का ध्वज धारण करता है जहाँ उसका पंजीकरण हुआ है, जिससे उसे कम कर एवं कम पंजीकरण शुल्क का लाभ प्राप्त होता है और परिचालन लागत घटती है।
    • पनामा, लाइबेरिया तथा मार्शल द्वीपसमूह सुविधा ध्वज पंजीकरण के सबसे लोकप्रिय देशों में शामिल हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुसार, जहाज के विनियमन, सुरक्षा एवं संरक्षण की प्राथमिक जिम्मेदारी ध्वज राज्य की होती है।
    • इससे ऐसे जहाजों से जुड़े समुद्री विवादों, हमलों, हिरासत या अन्य आपात स्थितियों में भारत की प्रत्यक्ष हस्तक्षेप क्षमता सीमित हो जाती है।
    • परिणामस्वरूप, भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा के लिए भारत को प्रायः कूटनीतिक संवाद, वाणिज्य दूतावासीय सहायता तथा संबंधित ध्वज राज्य के सहयोग पर निर्भर रहना पड़ता है।

नाविकों की सुरक्षा हेतु भारत के प्रयास

  • ऑपरेशन : भारत ने खाड़ी क्षेत्र में वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशन संकल्प प्रारंभ किया।
  • प्रमुख विशेषताएँ: समुद्री निगरानी तथा भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की तैनाती।
    • हमलों के खतरे का सामना कर रहे जहाजों को सहायता प्रदान करना।
    • एस्कॉर्ट एवं सुरक्षा मिशनों का संचालन।
  • समुद्री डकैती-रोधी अभियान: भारत ने सफलतापूर्वक अपहृत जहाजों को मुक्त कराया है।
    • सोमालिया तट के निकट समुद्री डकैती के खतरों को निष्प्रभावी किया है।
    • लाल सागर क्षेत्र में हूती हमलों से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।

निष्कर्ष

  • भारतीय नाविक वैश्विक समुद्री व्यापार एवं ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं के महत्वपूर्ण आधार हैं। बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य तथा समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की विदेश नीति, समुद्री रणनीति एवं राष्ट्रीय हितों का एक महत्वपूर्ण अंग बन गया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रभावी समुद्री कानूनों तथा भारत की सक्रिय नौसैनिक उपस्थिति की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्रोत: TH

 

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